“A MAN AND A GIRL “

“*A MAN AND A GIRL *”
He lost his job was fine
Coz he had a soul to live on
His girl that was nine
His solitary life bloomed to a nightingale’s hymn
An innonect soul with large eyes fair skin
She wasn’t his by blood but by heart and soul
To lift him from shadows she had a prominent role
Years passed on she was nine no more
Fatima; a teen girl, who loved sea shore
Everything changed except a constant relation
Now she loved her dad with more possession
In the crowded city she never felt alone
Coz she knew someone was waiting home
To a monsoon night with showers above
Few falcons were roaming finding love
Love that was to be undressed and Love that meant seizure
It was eleven at clock and dark raining sky
She was caught and nightangle couldn’t fly
An attack on soul and hues and cries
Loving showers came at a price
The dark streets echoed with screams
The lust of young shattered aged dreams
There someone was waiting for his little girl
He didn’t knew he lost everything and was left with none
He ran hither and thither looking for his Angel
Every street every park; this world from every angle
And when found it was three in clock; he beheld a sight
Stagnant; He slapped himself for it could be a might
Naked wasn’t painful as breathless was
He faltered He fell; Saw his shattered pride
He lost his girl to scavenger
That’s when a man cried.!

Advertisements

“महज़ लफ्ज़ो का नशा काफी है शराब की ज़रूरत नहीं ।”

“महज़ लफ्ज़ो का नशा काफी है
शराब की ज़रूरत नहीं ।”

टूटे दिलों को सम्भालना सीख लिया है
खुशियों का तौहफा आज खुद को दिया है
माया मोह का बंधन तोड़ आज
खुद की हुकूमत का किला फतह किया हैं
हकीकतें बेहद खूबसूरत बना ली है हमने
ख्वाब की ज़रूरत नहीं
महज़ लफ्ज़ो का नशा काफी है
शराब की ज़रूरत नहीं ।

हिदायतें बहुत मिली दुनिया के गलियारों से
जीने की हिम्मत मिली कच्चे पक्के यारों से
न कुछ लिया न कुछ दिया जमाने को
महज़ हमराही बने दीवारों से
अब कागज कलम काफी है
महताब की ज़रूरत नहीं
महज़ लफ्ज़ो का नशा काफी है
शराब की ज़रूरत नहीं ।

मुझे खोने या न खोने की कश्मकश में वो आज भी डूबा हुआ है
सूनेपन के तूफान ने आज उसका दामन छुआ हैं
बस नाकामयाबी के दस्तूर से दूर रहे वो
ये उसकी खातिर मेरी आखिरी दुआ हैं
मगर ये जान लीजिएगा जनाब
अब आपकी ज़रूरत नहीं
महज़ लफ्ज़ो का नशा काफी है
शराब की ज़रूरत नहीं ।

शुक्रिया ।

I wasn’t crying.!

And yes this time once again
I was left alone in the threatening rain
Tearing some memories apart I was walking
The vocals were shut but soul was brutally talking
My expectations tore me up once again
I was surviving the dreadful rain
But literally I am not lying
I wasn’t crying.!

I was lost in the darkness of his soul’s core
Being a lioness had to roar
Under the starry spheres a beauty was turning to beast
Still someone was bothered least
The garland was drying under the pitiful showers
A mighty soul lost all its powers
But literally I am not lying
I wasn’t crying.!

When the city was drunk a soul was craving for concern
A new chapter of pain I was forced to learn
I shouldn’t have given that second chance over him
I would have doubted a glance over him
But I was fallen into the pit of love
And he never knew the shit called love
He was more of a bumble bee desiring multiple flowers
Consequently I was surviving the dreadful showers
But literally am not lying
I wasn’t crying.!

हर बार मैं ही क्यों।

क्यो गलती किसी की भी हो
दंड मेरा होता है
क्यों अपमान सदा
अखंड मेरा होता है
दुर्गा भी मै काली भी मै
शुभचिंतक भी मै सहेली भी मै
माँ भी मै बहन भी मै
संगिनी भी मै और अकेली भी मै
क्यों मेरा अस्तित्व छुपाया जाता है
क्यो मुझे अपनाया नहीं जाता है
कुर्बानी मेरे नाम होती है
पर कहीं मेरा नाम नहीं होता
ऐ मेरे मालिक बनाया ही क्यो तूने इस नारी को
छल्ली-छल्ली कर दिया समाज ने जिस बेचारी को
वरना वो दिन दूर नही जब ये समाज देखेगा मेरा विध्वंश
तब देखेंगे कहा तक चलता है इनका वंश…..।

इश्क बसता हैं पहाड़ों में ।

कोयल की कूक में शेर की दहाड़ो में
इश्क बसता है पहाड़ों में ।

घरों से बड़े वहाँ दिल होते हैं
सबसे संग हँसते हैं संग रोते हैं
जन्नत का नूर झलकता हैं
जब गागर का पानी छलकता हैं
रोता हसँता है पहाड़ों में
इश्क बसता हैं पहाड़ों में ।

फूलों की खुशबू से सदा महका रहता हैं
पक्षियों की ध्वनियों से चहका रहता हैं
बर्फ की चादर तले ढका रहता हैं
हर अजनबी यहाँ आ यहीं कहता हैं
लोग सीधे टेड़ा रस्ता हैं पहाड़ों में
इश्क बसता हैं पहाड़ों में ।

तेरे शहर से गुजरते हुए ।

गुनगुनाते हंसते हम
काट रहे थे रास्ते हम
कि बहुत दूर जाना था हमें
एक हसीन ख्वाब सजाना था हमें
बंजारो सी हस्ती हम
करते पूरी मस्ती हम
कि अचानक धड़कन थम सी गई
आंखें नम सी गई
कुछ याद यूँ आया हमको
शायद भुला नहीं पाए तुमको
बहुत रोए हम उस पहर से गुजरते हुए
तेरे शहर से गुजरते हुए ।
उम्मीद नहीं थी पर तू दिख जाए आंखों की ख्वाहिश थी
कुदरत एक बार फिर कर रही वही साजिश थी
वो हसीन संमा पल में बिखर चुका था
दिल मेरा तेरे कदमों तले रुका था
मैं एक बार फिर बहकने लगी थी
तेरे नाम से चहकने लगी थी
तुझे भुलाने की हर कोशिश धरी रह गई
तूने जो की मेरी वो नुमाइश धरी रह गई
तेरे घर के सामने वाला मंदिर याद है मुझे
जो घंटों मैंने तेरे लिए की याद वह फरियाद है मुझे
कैसे मुस्कुराती थी ना मैं
तेरे कहर से गुजरते हुए
तेरे शहर से गुजरते हुए।
रौंद गई मुझको तेरी यादें
तोड़ गए मुझको तेरे वादे
बेवफ़ा नहीं कहेंगे तुझे क्योंकि इश्क हमने किया था
खुद मरते मरते हमने तुझे जिया था
एक तरफा मोहब्बत थी ना हमारी
तुम्हें चाहने की जुर्रत थी ना हमारी
हमें दफनाने की कोशिश तो बहुत की तुमने
पर अफसोस हम जी गए
उस जहर से गुजरते हुए
तेरे शहर से गुजरते हुए।

Best version of you!!

Somewhere in the darkness of your being there lies your inner conscious:your god,your energy,your soul.It is often heard that follow your dreams,follow your goals!!But the true fact is you own someone that’s thousand times better than you Yeah!Astonishing!!Right?

Whenever you fall there’s always a hope that lifts you,there’s always a driving force that lifts you up.Thats your conscious…..Your god….

It is supreme.Own its mercy and avoid criticism,own its grace and avoid hatred,own his love and avoid pride…

Be the one that holds mercy..!

Be the one that forgives..!

Be the one who loves..!

That will lead you to the most gracious version of you!!

Aayushi Kulashri